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सांस लेने का तरीका बदलिà¤, जिंदगी बदल जाà¤à¤—ी
हम सà¤à¥€ जानते हैं कि पà¥à¤°à¤¾à¤£ के बिना जीवन संà¤à¤µ नहीं। पà¥à¤°à¤¾à¤£ गति है, सà¥à¤ªà¤‚दन है। बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤‚ड में पà¥à¤°à¤¾à¤£ है, इसलिठवह सतत गतिमान है। हम à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£ के चलते ही जीवित हैं। हम तक यह पà¥à¤°à¤¾à¤£ हमारी सांस के जरिठपहà¥à¤‚चता है। हम जितनी ताकतवर सांस ले पाते हैं यानी हमारी सांस में जितनी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ रहती है, हममें उतना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जीवन, उतनी ऊरà¥à¤œà¤¾ बनी रहती है। सांस अगर कमजोर है, तो हमें सांस के जरिठमिलने वाली जीवन ऊरà¥à¤œà¤¾ à¤à¥€ कम मिलती है। यह ऊरà¥à¤œà¤¾ जितनी कम होती है, हम उतना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बीमार रहते हैं और उतना ही à¤à¤• आनंद à¤à¤°à¥‡ जीवन से वंचित बने रहते हैं। सांस लेने में पांच à¤à¤¸à¥€ बड़ी गलतियां हैं, जो उसे कमजोर बनाती हैं और हमें पà¥à¤°à¤¾à¤£ ऊरà¥à¤œà¤¾ से वंचित करती हैं। आइठजानते हैं कौन सी हैं वे पांच गलतियां।
पहली बात यह है कि होश में सांस लें, बेहोशी में नहीं
सांस लेने में हम सबसे बड़ी और सबसे पहली गलती यह करते हैं कि बेहोशी में सांस लेते हैं। इन पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को पढ़ते हà¥à¤ जरा आप अपनी सांस के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जागरूक हो जाइà¤à¥¤ आप देखेंगे कि जागरूक होते ही आपकी सांस उथली से गहरी होने लगेगी। यह बेहोशी में ही होता है कि हम उथली सांस लेते रहते हैं और शरीर निरंतर ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ की कमी में बना रहता है। दिमाग में ऊरà¥à¤œà¤¾ कम पहà¥à¤‚चती है और इस तरह हम जलà¥à¤¦à¥€ थकने लगते हैं, जलà¥à¤¦à¥€ चिड़चिड़े होने लगते हैं।
महातà¥à¤®à¤¾ बà¥à¤¦à¥à¤§ ने अपने शिषà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को सबसे पहले अपनी सांस के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ होशपूरà¥à¤£ होना सिखाया था। याद रखिठकि जब तक आप पूरे होश में à¤à¤°à¤•र सांस नहीं लेंगे, तब तक अपने à¤à¥€à¤¤à¤° करिशà¥à¤®à¤¾à¤ˆ ऊरà¥à¤œà¤¾ महसूस नहीं कर पाà¤à¤‚गे। चाहे सांसारिक जीवन में सफलता हो या आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• जीवन में, उसका पहला कदम आपकी सांस है। बोध और होश से ली गई सांस आपको हमेशा के लिठबदल सकती है।
दूसरी जरूरी बात यह है कि नाक से सांस लें, मà¥à¤‚ह से नहीं
पà¥à¤°à¤•ृति ने हमारे शरीर के हर अंग की बनावट उसके जरिठहोने वाले काम के हिसाब से तय की है। पैर चलने के लिà¤, कान सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ के लिà¤, आंख देखने के लिठऔर मà¥à¤‚ह खाने के लिठबनाया गया है। सूंघने के अलावा नाक का मà¥à¤–à¥à¤¯ काम सांस लेना है। सांस लेने के जितने लाठहैं, वे हमें तà¤à¥€ मिलते हैं जब हम नाक से सांस लेते हैं। नाक की बनावट à¤à¤¸à¥€ है कि ली गई सांस नाक से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥‡ हà¥à¤ ठीक तरीके से अनà¥à¤•ूलित होती है, हवा में मिले जीवाणà¥-कीटाणॠआदि नाक के à¤à¥€à¤¤à¤° ही रà¥à¤• जाते हैं, इस हवा को à¤à¤¸à¥‡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°à¤¾à¤‡à¤œ किया जाता है कि वह फेफड़ों में à¤à¥€à¤¤à¤° तक पहà¥à¤‚च सके। जाहिर है, नाक से सांस लेना छोड़कर अगर आप मà¥à¤‚ह से सांस लेंगे, तो इन सà¤à¥€ लाà¤à¥‹à¤‚ से वंचित हो जाà¤à¤‚गे। लेकिन बहà¥à¤¤ से लोगों को मà¥à¤‚ह से सांस लेने की आदत लग जाती है। वे रात को à¤à¥€ मà¥à¤‚ह से ही सांस लेते हैं। यही वजह है कि सà¥à¤¬à¤¹ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गला सूखा और दरà¥à¤¦ करता हà¥à¤† मिलता है। अगर वाकई आपको रात को मà¥à¤‚ह से सांस लेने की आदत है, तो आप टेप लगाकर अपना मà¥à¤‚ह बंद करके सोà¤à¤‚। सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि आप हमेशा नाक से ही सांस ले रहे हैं और नाक से ही सांस छोड़ रहे हैं।
तीसरी जरूरी बात यह है कि पेट से सांस लें, छाती से नहीं
कà¥à¤¯à¤¾ आपने सांस लेते हà¥à¤ किसी छोटे बचà¥à¤šà¥‡ को देखा है। जरा देखिठउसे। आप पाà¤à¤‚गे कि सांस लेते हà¥à¤ उसका पेट फूलता है। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठहोता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बचà¥à¤šà¥‡ पेट से सांस लेते हैं। यही सांस लेने का सही तरीका à¤à¥€ है। पेट से सांस लेते हà¥à¤ डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® जब फैलता है, तो पेट फूलता है। योग में इस डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® बà¥à¤°à¥€à¤¦à¤¿à¤‚ग कहते हैं। अगर आप अपनी सांस के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ थोड़ा à¤à¥€ जागरूक होंगे, तो पाà¤à¤‚गे कि जब à¤à¥€ आप अपने काम में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ होते हैं, आपकी सांस बहà¥à¤¤ उथली हो जाती है। यानी आपकी सांस छाती के ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ से नीचे ही नहीं जाती। वह ऊपर ही से लौट आती है। नतीजतन आपके शरीर को परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ नहीं मिल पाती।
आप अगर कà¥à¤› दिनों तक डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® बà¥à¤°à¥€à¤¦à¤¿à¤‚ग का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करें, तो आप धीरे-धीरे शरीर को पेट से सांस लेने की आदत डाल सकते हैं। अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करने का सबसे सरल तरीका है कि आप पीठपर लेट जाà¤à¤‚ और अपने पैरों को फोलà¥à¤¡ करके अपने हिपà¥à¤¸ के करीब ले आà¤à¤‚। अब आप अपना बांया हाथ पेट पर रख लें और दायां हाथ शरीर के समानांतर जमीन पर रहने दें। सांस लेते हà¥à¤ अपने पेट पर रखे हाथ को ऊपर उठता महसूस करें। जितनी देर सांस लें उतनी ही देर सांस छोड़ें। रोज 5-7 मिनट का à¤à¤¸à¤¾ अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ आपको पेट से सांस लेने का आदी बना देगा।
चौथी जरूरी बात यह है कि धीमी और गहरी सांस लें, तेज और उथली नहीं
जब हम पेट से सांस लेना शà¥à¤°à¥‚ करते हैं, तो उसका à¤à¤• लाठयह मिलता है कि हमारी सांस लंबी और गहरी होने लगती है। योग का नियमित अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करने वाले जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° योगी à¤à¤¸à¥‡ ही लंबी और गहरी सांस लेते हैं। सांस जितनी धीमी, जितनी गहरी ली जाà¤, वह हमें उतनी ही लंबी उमà¥à¤° देती है। अगर आप गौर करेंगे, तो पाà¤à¤‚गे कि जो जानवर जितनी तेज सांस लेता है, वह उतनी तेजी से अपनी उमà¥à¤° à¤à¥€ खतà¥à¤® करता है। खरगोश और कà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¾ जलà¥à¤¦à¥€-जलà¥à¤¦à¥€ सांस लेते हैं। उनकी आयॠà¤à¥€ उतनी ही कम होती है। हाथी उनकी तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में कहीं धीमे सांस लेता है, तो हाथी की उमà¥à¤° सौ वरà¥à¤· लंबी हो जाती है। कछà¥à¤† हाथी से à¤à¥€ धीमे सांस लेता है, तो वह 300 साल तक à¤à¥€ जीता है।
अब आप इस तथà¥à¤¯ के पीछे का विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ à¤à¥€ समà¤à¤¿à¤à¥¤ हम जितनी धीमी और लंबी सांस लेते हैं, हमारे शरीर में उतनी ही जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ जाती है और शरीर को जितनी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ मिलती है, वह उतना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बीमारियों के खिलाफ सफलतापूरà¥à¤µà¤• लड़ते हà¥à¤ निरोगी बना रहता है। शरीर जितना निरोगी बना रहता है, उसकी उमà¥à¤° उतनी ही बढ़ जाती है।
और अब बारी है पांचवीं जरूरी बात की, आप सांस छोड़ने पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें, सांस लेने पर नहीं
अगर आप जागरूक होकर सांस लें, तब à¤à¥€ अगर आपके फेफड़े खाली नहीं हैं, तो आप लंबी सांस नहीं ले पाà¤à¤‚गे। जब तक आपके फेफड़े खाली न हों, आप सांस à¤à¤°à¥‡à¤‚गे कहां। इसलिठसांस लेने से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सांस छोड़ने पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिठजाने की जरूरत है। आप इसे सà¥à¤µà¤¯à¤‚ करके देखिà¤à¥¤ अपनी सांस के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जागरूक रहते हà¥à¤ आप सामानà¥à¤¯ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक सांस को छोड़िà¤à¥¤ आप जितनी देर तक सांस को छोड़ेंगे, आप उतनी ही देर तक सांस को खींच à¤à¥€ पाà¤à¤‚गे। यानी आपका रेचक जितना लंबा होगा, पूरक à¤à¥€ उतना ही लंबा होगा। रेचक सांस छोड़ने की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को कहते हैं और पूरक सांस लेने की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को। यह à¤à¤¸à¤¾ ही है कि आप à¤à¤• à¤à¥‚ले को जितना पीछे ले जाते हैं, वह उतना ही आगे à¤à¥€ जाता है। अगर आप सांस को ठीक से छोड़ेंगे नहीं और फेफड़े पूरी तरह सिकà¥à¤¡à¤¼à¥‡à¤‚गे नहीं, तो वे पूरी सांस à¤à¤°à¤•र जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खà¥à¤² à¤à¥€ नहीं पाà¤à¤‚गे। यानी जब à¤à¥€ आपका लंबी गहरी सांस लेने का मन हो, आप तब उतनी ही देर तक सांस को छोड़ने का काम करें। अलबतà¥à¤¤à¤¾, आप सांस छोड़ने पर ही धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें, सांस लेना अपने आप घटित होने दें। शरीर अपनी सांस की कमी को आपसे खà¥à¤¦ ही पूरा करवा लेगा।
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